जंक और फास्ट फूड न खाएं -
भागदौड भरी जिंदगी में फास्ट फूड और जंक फूड लोगों का सबसे पसंदीदा खाना हो गया है। समय की कमी की वजह से लोग इसका अधिक मात्रा में सेवन करते हैं। फास्ट फूड में कोलेस्ट्राल की अधिक मात्रा होती है। फास्ट फूड को अवोइड कर कोलेस्ट्राचल की मात्रा कम की जा सकती है।
कोलेस्ट्रोलयुक्त खाना न खाएं –जिन खाद्य पदार्थों में कोलेस्ट्राल की मात्रा अधिक हो उनका सेवन ना करें। अंडा, दूध, मांस, मछली और चोकलेट में सबसे ज्यादा मात्रा में कोलेस्ट्रोल पाया जाता है। अंडे के पीले भाग में सबसे ज्यादा मात्रामें कोलेस्ट्रोल पाया जाता है। ब्रेकफास्ट्, लंच और डिनर के दौरान इन खाद्य पदार्थों के सेवन करने से बचें।
कोलेस्ट्रोल कम करने वाले खाद्य पदार्थ –
सोयाबीन –
सोयाबीन में आइसोफ्लेविन्स नामक प्रोटीन होता है, जिससे शरीर में मौजूद कोलेस्ट्रोल और अतिरिक्त फैट कम होता है। इसके अलावा चर्बी बढाने वाले कोशिकाओं की वृद्धिको रोकता है।
नींबू -
एक ग्लास पानी में एक नींबू निंचोडकर हर रोज सुबह बिना ब्रश किए पिएं। अगर शरीर में ज्यादा फैट और कोलेस्ट्रोल है तो हर रोज दो नींबू पानी में निंचोडकर पिएं। हर रोज नींबू का प्रयोग करने से कोलेस्ट्रोल की मात्रा कम हो जाती है।
शहद –
कोलेस्ट्रोल घटाने के लिए हररोज शक्कर की जगह शहद का इस्तेमाल कीजिए। दो चम्मच शहद एक गिलास हल्के गुनगुने पानी में डालकर उसमें एक नींबू निचोडकर हर रोज सुबह-शाम इसका सेवन करें।(मधुमेह से पीड़ित इसका प्रयोग न करे)
दही -
दही का हर रोज सेवन करने से शरीर में मौजूद कोलेस्ट्रोल और फैट कम होता है। हर रोज दो से तीन बार दही खाएं तथा मट्ठा पिएं।
मूली-
दो बडा चम्मच मूली का रस शहद में मिलाकर बराबर मात्रा में लगभग एक महीने तक सेवन करें, इससे कोलेस्ट्रोल घटेगा।
पानी -
हर रोज पानी का ज्यादा मात्रा में सेवन करें। पानी शरीर से अतिरिक्त चर्बी को घटाकर मोटापा कम करता है। पानी शरीर में मौजूद कोलेस्ट्रोल की मात्रा को नियंत्रित करता है।
कोलेस्ट्रोल के नुकसान -
शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा होना फायदेमंद तो है लेकिन शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढने से हृदय को खतरा हो जाता है। खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक बढ जाने से वह रक्त कोशिकाओं में जम कर हृदय रोग उत्पन्न करता है। शरीर में कोलेस्ट्रोल घटाने के लिए उन खाद्य पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए जिनमें वसा की मात्रा कम हो। इसघलिए अपने आहार में मूली, गाजर, मेथी का साग, लहसुन, हरी और पत्तेदार सब्जियां, छिलकेदार दालें, प्याज, अदरक, लहसुन और हींग आदि
स्वस्थ हृदय के लिए 20 योग आसन (किसी जानकार की सहायता आवश्य लें एवं उनकी निगरानी मे ही करें)
योग अपनी साँसों पर ध्यान देते हुए विभिन्न मुद्राओं में रहने की कला है| परिणामस्वरूप प्रत्येक योगासन का हमारे स्वसन तन्त्र पर विशेष प्रभाव पड़ता है,जिससे हमारा हृदय भी प्रभावित होता है।
निम्नलिखित आसनों के क्रम में हलकी मुद्राओं से शुरुआत करते हुए धीरे धीरे उन आसनों की तरफ आगे बढ़ेंगे जिनमें अधिक सामर्थ्य व् शक्ति की जरुरत होगी।आखिरी मुद्राओं के साथ शरीर शांत व् स्फूर्तिवान हो जाता है।
1. ताड़ासन
ताड़ासन ह्रदय को मजबूती देता है और शरीर में लचीलेपन को बढ़ाता है।
2. वृक्षासन
वृक्षासन मन को शांत व् संतुलित करता है ।शांत मन के लिए यह मुद्रा लाभदायक है| इससे ह्रदय की कार्य प्रणाली बेहतर होती है।
3. ऊथिताहस्तपादासन
इस मुद्रा में संतुलन बनाए रखने के लिए अधिक ध्यान व् शक्ति की जरुरत होती है।
4. त्रिकोणासन
यह खड़े रहकर की जाने वाली ह्रदय को खोलने वाली मुद्रा है।यह मुद्रा हृदयवाहिनी तन्त्र को लाभ पहुँचाती है। गहरी साँस लेने से छाती का फैलाव होता है व् सामर्थ्य में बढ़ोतरी होती है।
5. वीरभद्रासन
वीरभद्रासन शरीर में संतुलन को बेहतर करता है व् सामर्थ्य बढ़ाता है।यह तनाव को कम करने व् मन को शांत करने के साथ साथ हृदय गति को भी नियंत्रित करता है।
6. उत्कटासन
इस मुद्रा में आपको स्वसन व् ह्रदय गति में बढ़ोतरी महसूस होगी। इससे ऊष्मा व् शक्ति मिलती है।
7. मार्जारीआसन
यह मुद्रा कुर्सी आसन के बाद बेहद आरामदायक प्रतीत होती है क्योंकि इससे हृदयगति फिर से सामान्य व् लयबद्ध हो जाती है।
8. अधोमुखोस्वानआसन
यह मुद्रा विश्राम के लिए उपयोग में लाई जाती है जिससे तंत्रिकाओं को शांति व् ऊर्जा मिलती है।
9. भुजंगासन
यह मुद्रा छाती के फैलाव को बढ़ाती है और इसमें सालम्ब भुजंगासन की तुलना में अधिक शक्ति व् सामर्थ्य की जरुरत होती है।
10. धनुरासन
पूरे शरीर को गहरा खिंचाव प्रदान करने वाला धनुरासन हृदय क्षेत्र को मजबूती देता है।
11. सेतुबंधासन धनुरासन कि तुलना में यह मुद्रा आसान होती है। सेतुबंधआसन गहरी साँस लेने में मदद करता है, छाती के हिस्से में फैलाव व् रक्त संचार को बढ़ाता है।
12. सालंब सर्वांगासन
कंधो के सहारे खड़े होने पर यह परानुकमपी तन्त्रिका तन्त्र को उतेजित करता है और छातीमें फैलाव लाता है।विश्राम देने के साथ साथ यह मुद्रा ऊर्जावान भी बनाती है।
13. अर्धमत्सेन्द्रासन
बैठे हुए रीढ़ को आधा मोड़ना पूरे मेरुदंड के लिए काफी लाभदायक है| इससे छाती में फैलाव उत्पन्न होता है।
14. पश्चिमोतानासन
बैठकर आगे की ओर झुकने से सिर ह्रदय से नीचे आ जाता है, जिससे हृदयगति व् स्वसनगति में कमी आने से विश्राम मिलता है।
15. दंडासन
उपरोक्त सभी मुद्राओं के विपरीत इस मुद्रा में पीठ को मजबूती मिलती है व् कन्धों और छाती को फैलाव मिलता है।
16. अर्धपिंचमयूरासन
यह अधो मुखो स्वान आसन से अधिक कठिन है ।इससे सामर्थ्य में बढ़ोतरी होती है व शरीर के ऊपरी भाग को मजबूती मिलती है ताकि हृदय को लाभ पहुचानेवाली मुद्राएँ की जा सके।
17. मकर अधोमुखशवासन मकर अधो मुखशवासन से हृदय की पम्पिंग नियमित होती है।
18. सालंब भुजंगासन
इसमें रीढ़ की हड्डी थोड़ी से मुड़ती है जिससे छाती खुलती है व् फेफड़ों और कन्धों में खिंचाव होता है।
19. शवासन
सभी योग मुद्राओं के बाद शवासन से गहरा विश्राम मिलता है| इससे शरीर व् स्वांस में सूक्ष्म परिवर्तन आते हैं जो पूर्ण स्वास्थय के लिए बेहद जरूरी है।
20. अंजुली मुद्रा
यह मुद्रा हृदय को खोलने, मस्तिष्क को शांत रखने के साथ ही तनाव व् व्याकुलता को कम करती है।
Not:- इस लेख में दी गई सभी जानकारी, सुझाव, सामान्य जानकारी और सूचना के उद्देश्य के लिए लिखे गए हैं। इन घरेलू उपचारों और खान-पान की आदतों पर भरोसा करने से पहले कृपया डॉक्टर से सलाह ले

Social Plugin